चोक्ड : पैसा बोलता है | Choked
चोक्ड हालही में रिलीज हुई हिंदी भाषिक फिल्म जिसे अनुराग कश्यप द्वारा निर्देशित किया गया है और साथही में अनुराग ईस फिल्म के सहायक निर्मिता भी है| रिलीज कि सटीक तारीख की बात करे तो यह फिल्म ५ जून २०२० को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है| यह फिल्म निहित भावे द्वारा लिखी गई है और ईस फिल्म को संयुक्त रूप से नेटफ्लिक्स और गुड बेड फिल्म्स द्वारा अपने प्रोडक्शन तले निर्मित किया गया है| फिल्म में संयमी खेर और रोशन मैथ्यू मुक्ख्य भूमिका में है और अमृता सुभाष, राजश्री देशपांडे सहायक भूमिका है| यह फिल्म राजकीय व्यवस्था से निर्माण हुई अस्थिर परिस्थिती जो के काल्पनिक है उस पर भाष्य करती है| फिल्म के कूछ चुनिंदा संवांद राजकीय व्यवस्था पर चुटकी लेते है जो धीरेसे परिस्थिती कि गंभीरता दर्शाते है पर वह इतने सहजता से दर्शाए गए है के आप अगर फिल्म को ध्यान से देखें तो पकड मे आते है| वास्तविक में फिल्म की कहानी का और राजकीय परीस्थीथी का सीधे तौर पर कोई संबंध नही है|
ईए अब रुख करते है फिल्म की कहानी की तरफ…
लेखन : निहित भावे
फिल्म मे संयमी खेर जो के सरिता पिल्लई के रूप मे है वह एक बँक मे काम करती है जीससे उसका घर चलता है| पती याने रोशन मैथ्यू जो के सुशांत पिल्लई की भूमिका में है वह बेरोजगार होने के कारण घर की सारी जिम्मेदारी सरिता पर है| सरिता का किरदार शुरवात से ही परिवार के जिम्मेदारी तले दबी हुई औरत के रूप में दर्शाया गया है| फिल्म कि कहानी मे नएपन का आभाव है, कूछ आश्चर्यजनक घाटनाक्रमो से उत्पन्न हुई परिस्थितीया फिल्म में दर्शाई गई है… ईस तरह कि फिल्म आपने पहले भी देखी है ऐसा आपको कही न कही प्रतीत होता है| फिल्म की कहानी और घटनाए ईस फिल्म को एक औसत फिल्म कि श्रेणी मे ले जाती है| लेकीन अगर आप दिग्दर्शन और अभिनय कि बात करे तो यहा आपको ठहराव नझर आता है| अनुराग कश्यप हमेशा कि तरह अपने निर्देशन कि कसौटी मे खरे उतरते नझर आते है तो दुसरी तरफ सभी कलाकारो ने अपने बेहतरीन अभिनय का प्रदर्शन किया है|
फिल्म मे पैसो के अभाव और झिम्मेदारी का एकतरफा बोझ के तले औरत सरिता पिल्लई जो के कभी एक गायिका हूआ करती थी वह अपनी एक गलती के कारण से पारिवारिक जीवन में हद्द से झ्यादा दुखी है| उसका पती जो के एक संगीतकार है सरिता कि एक गलती से वर्षो से उससे नाराज है जिसके चलते वह कोई ढंग का काम नही कर पाता है, और व्यापार मे भी कर्ज के बोझ के तले दबा होता है| जिसका खामियाझा सरिता को भुगतना पडता है| जिस वजह से घर में कलह और एक अजीब सी खामोशी भी है| जिसके चलते सरिता का संयम परीस्थीतीयों को लेकर छुटने ही वाला होता है तब उसके सामने आश्चर्यजनक रूप से पैसो एक भंडार लग जाता है| और कहानी आगे बढती है| कहानी कि पटकथा इतनी प्रभावशाली नही है जितनी कि फिल्म के शुरवात में लगती है|
फिल्म के कूछ चुनिंदा सीन आपको पसंद आ सकते है जैसे देर रात तो बिस्तर पर सरिता और सुशांत का प्लंबर को लेकर धीमी आवाज में झगडा करना जीससे उनके बीच सोया उनका बेटा कही आवाज से उठ ना जाए बाद में सच झूठ साबित करने के लिए बच्चे को जगा देना… फिल्म मे हमेशा कि तरह निम्न मध्य वर्ग के घर कि बारीकीया दर्शाने से निर्देशक नही चुके फिल्म कि एडिटिंग कही कहीआपको पसंद आएगी, कूच प्रसंग आपकी उत्सुकता भी बढायेंगे जैसे सरिता का एक विडीओ सोसायटी में घुमना यह प्रसंग दर्शक के रूप मे आपकी उत्सुकता बढाता है| अमृता सुभाष जो एक बेहतरीन और साथ ही में मराठी इंडस्ट्री में एक में प्रस्थापित अभिनेत्री है, जिन्होने सेक्रेड गेम्स 2 में अपने अभिनय से सभिको प्रभावित किया है उनका किरदार फिल्म में किरदार बदलता नझर आता है जो के दर्शको के लिहाज से समझ से परे हो जाता है एस पटकथा के बारीकियो के आभाव से होता हुआ नझर आता है|कुल मिलाकर एक औसतन फिल्म है, आप मनोरंजन के लिहाज से इसे एक बार झरूर देख सकते है|


