हम आज क्या कहे कुछ समझ नही पा रहे है, न्यूज चेनलो के लीए यह खबर हो सकती है| लेकीन सुशांत सिंघ राजपूत के चाहने वालो के लिए यह किसी भी तरहसे खबर नही हो सकती है| हम सभी जानते है के आजकल खबरे टीवी न्यूज चेनलो से पेंहले सोशल मिडिया पर आ जाती है| जैसा के आप पहले से ही जानते है हम बात कर रहे है सुशांत सिंघ राजपूत की आत्महत्या की हलांकी इस मामले मे जाचं पडताल अभी जारी है लेकीन प्रथम दर्शनी सुत्रो के हवाले से यह बताया गया है कि यह प्रकरण आत्महत्या का है| कहा जा रहा है के लंबे समय से डिप्रेशन के चलते सुशांत सिंघ ने यह कदम उठाया है, हालांकी यह खबर काफी दुख:द और चौंका देने वाली है| आज दोपहर (१४/६/२०२०) करीब करीब ३ बजे के आसपास जैसे ही यह खबर मिडिया मे आई तो सभी ओर से यह गंभीर चर्चा का विषय बना हुवा है|
सुशांत सिंघ राजपूत जिनके सिने करिअर की शुरवात स्टार प्लस कि २००८ में बनी टीव्ही सिरीअल “किस देश मे है मेरा दिल” से शुरू हुई थी जिसमे उनको व्यक्तिगत रुपसे सफलता नही हासील हुई लेकीन उसके तुरंत बाद वर्ष २००९ मे बनी टीव्ही सिरीअल पवित्र रिश्ता के उनके किरदार को दर्शको ने बहुत सराहा और उन्हे इस किरदार के लिए लीव्हिंहिजन पुरस्कार से भी नवाझा गया सुशांत ने तबसेही अपना फेन बेस बना लिया था|
सुशांत सिंघ आगे चलकर अपने अभिनय और मेहनत के दम पर टेलीव्हिंहिजन कि दुनिया से बाहर निकल हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में फिल्म “काय पो छे” (२०१३) में अभिनेता राज कुमार राव के साथ मुक्ख्य भूमिका में नझरआए| जिसमे उन्होने सपनो से भरे एक नौजवान कि भूमिका निभाई है| जो के एक गरीब घर से है और जो बहुत अच्छा क्रिकेट खेलते है| फिल्म में उनका और राज कुमार राव का अभिनय सराहनीय था जो के सामिक्षको को और दर्शको को काफी हद तक पसंद आया, उन्हे इस फिल्म के लिए बेस्ट फिल्म डेब्यू के तौर पर फिल्मफेअर अवार्ड्स में नामांकन भी मिला| और फिर असल जिंदगी में सुशांत सिंघ का फिल्मी करियर दौड पडा… उसके तुरंत बाद सुशांत ने २०१३ में ही “शुद्ध देसी रोमान्स”, २०१४ में “पिके” और २०१५ में “डिटेक्टीव ब्योमकेश बक्षी” जैसी फिल्मे एक के बाद एक कि “शुद्ध देसी रोमान्स” और “डिटेक्टीव ब्योमकेश बक्षी” सुशांत मुक्ख्य भूमिका मे थे जबकी फिल्म “पिके” मे वह सहायक अभिनेता के रूप मे नझर आए जो २०१४ की बॉक्स ऑफिस पर सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी| वर्ष २०१६ में प्रदशित बायो फिल्म एमएस। धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी में सुशांत सिंघ मुक्ख्य किरदार एम.एस. धोनी जो के एक बहुतही जाने माने क्रिकेटर और भारतीय क्रिकेट टीम के सौरव गांगुली के बाद सबसे चहिते, लोकप्रिय और सफल कप्तान माने जाते है उनकी भूमिका मे नझर आए बताया जाता है फिल्म में धोनी के किरदार को निभाने के लिए सुशांत सिंघ ने काफी मेहनत की क्रिकेट और कप्तान धोनी कि मैदान और मैदान के बाहर के जीवन को समझने का और उसे अपने किरदार मे उतारने का पुरा प्रयास किया उनकी अपने किरदार के प्रती ईसी मेहनत दर्शको ने सिनेमा घरो मे काफी सराहा और इस फिल्म को ब्लोकबस्टर फिल्म कि श्रेणी में पहुंचा दिया यह फिल्म जो सुशांत २०१४ की “पिके” के बाद की बॉक्स ऑफिस पर सबसे ज्यादा कमाई करने वाली दुसरी और मुक्ख्य भूमिका में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली पहली फिल्म बनी| वर्ष २०१८ मे उनकी “केदारनाथ” फिल्म प्रदर्शित हुई और वर्ष २०१९ में प्रदर्शित हुई “छींछोरे” फिल्म ने काफी सुर्खीया और वाहवाई बटोरी सिर्फ ईस फिल्दम दर्शको द्वारा भी काफी अच्छी प्रतिकीयाए मिली फिल्म “छींछोरे” ने दुनियाभर से बॉक्स ऑफिस पर २०० कारोड से अधिक की कमाई की… फिल्म “छींछोरे” सुशांत सिंघ राजपूत कि सिनेमाघरो में रिलीज होणे वाली आखरी फिल्म बनी|
यह कैसी विडंबना है फिल्म “छींछोरे” जो परेशानी , चिंता, दुख और उससे होने वाली निराशा पर बात करती है जिसमे सुशांत सिंघ खुद अपने अभिनय और संवादो में इसपर सकारत्मक बात रखते दिखाई देते है जो के दर्शको के दिल को छूं जाती है उस बात पर वह खुद ठहरते दिखाई नही दिए| यह हमे अत्यंत खेद के साथ कहना पढ राहा है| हमें सुशांत सिंघ राजपूत के जाने से जितना दुख: है उससे कही झ्यादा दुख: वह जिस तरीके से गए उससे हुआ है| उनके ईस तरह से दुनिया से जाने के लिए सिर्फ वह खुद जिम्मेदार नही है तो अपने देश में चली आ रही समाज व्यवस्था भी कुछ अंश तक जिम्मेदार है| हम ऐसा इसलिये कह रहे है क्योंकी हमारे देश मे आज भी “Mental Health” यानी “मानसिक स्वास्थ” पर गंभीरता पूर्वक सोचा नही जाता, समझा नही जाता “मानसिक स्वास्थ” को जितना महत्व देना चाहिये उतना दिया नही जाता, “मानसिक स्वास्थ” के विषय को स्कुलो में पढाया नही जाता और अगर कही इस विषय को पढाया जाता भी होगा तो वो ना के बराबर ही होगा| “मानसिक स्वास्थ” ठीक न होने पर हमारे समाज मे आज भी लोग उस व्यक्ती को पागल या सिरफिरा समझने लगते है| हमे इस सोच से उपर उठकर सोचने कि झरुरत है| “मानसिक स्वास्थ” यह टी.बी. और कॅंसर जैसी बिमारियो से भी झ्यादा घातक साबित हो सकता है यह बार बार आत्महत्या जैसी घटनाओ से साबित हुआ है| जिनके पास धन, दौलत, शोहरत सबकुच होने के बावजुद वह मानसिक अस्थिरता से अपने आप को अछूता नही रख पाए… आज कि घटना काफी दुख:द है| २०२० ने हमें बहुत कूछ सिखाया और दिखाया भी| आज हमने एक “उभरते तारे को टूटते हुए भी देखा…”




the best logger for movies