![]() |
अफ़सोस एक भारतीय ब्लैक कॉमेडी वेब सीरीज़ है जिसका निर्देशन अनुभूति कश्यप ने किया है। गुलशन देवैया, सुलगना पाणिग्रही, अंजलि पाटिल और हेबा शाह अभिनीत, श्रृंखला एक उदास व्यक्ति का अनुसरण करती है जो आत्महत्या करना चाहता है लेकिन मरने में असमर्थ है। इसका प्रीमियर अमेज़न वीडियो पर 6 फरवरी 2020 को हुआ।
आईए अब रुख करते है वेब सीरीज कि तरफ…
टायटल : अफसोस
| पात्र : कलाकार नकुल : गुलशन देवैया आयशा मिरानी : सुलग्ना पाणिग्रही श्लोका : अंजलि पाटिल हीबा शाह : करिमा उपाध्याय बीर सिंह : आकाश दहिया मारिया गोम्स : रत्नाबली भट्टाचार्जी फोकटीया बाबा : रोबिन दास डॉक्टर गोल्डफिश : जेमी ऑल्टर जिम : दानिश सैत |
नकुल (गुलशन देवैया) मुंबई में स्थित एक संघर्षशील लेखक हैं, जो बेरोजगारी, प्रेमहीनता और व्यक्तिगत अपराध की भावना मन मे लेकर जी रहा है और इसके चलते जीवन में कठिन समय बिता रहा हैं। उसकी व्यक्तिगत अपराध की भावना उसे एक आत्मघाती रास्ते पर ले जाती है और वह अपने जीवन को समाप्त करने के रचनात्मक तरीकों से कोशिशे करता नझर आता है। एक अवसर ऐसा भी आता है के वह ट्रेन की पटरी पर जीवन समाप्त करणे हेतू आने वाली ट्रेन के सामने लेट जाता है, लेकिन उसी पटरी के किनारे प्लेटफोर्म पर मौजूद एक भिखारी उसे बचा लेता है, जो उसके बजाय खुद मृत हो जाता है (शुरवाती दृश्य)। नकुल इसके बाद एक झील में कूदता है, लेकिन दर्शकों द्वारा बचा लिया जाता है। उसकी मनोचिकित्सक श्लोका (अंजलि पाटिल) का तर्क है कि नकुल अगर अपने अंदर कि गहरियो मे झांक कर देखें तो वह वह मरना नहीं चाहते है, क्योंकि उसकी जीनेकी महत्वाकांक्षा हमेशा उस वक्त भी उसमें रहती है जब जब वह मौत को गले लगाने की कोशिश करता है, और उसकी यही महत्वाकांक्षा उसे उसके कुकर्मों से बचाती है।
उत्तराखंड के हरसिल शहर में एक स्थानीय पुलिसकर्मी बीर सिंह (आकाश दहिया) एक हिंदू मठ में 11 भिक्षुओं की हत्या की जांच कर रहा है। 12 वां भिक्षु और प्रमुख संदिग्ध फोकाटीया बाबा लापता है। इस बीच नकुल एक एजेंसी जिसका नाम “इमरजेंसी एग्जिट” है , उन के पास जाता है, जो असिस्टेड सुसाइड में माहिर है| एजेंट मारिया गोम्स (रत्नाबली भट्टाचार्जी) जो के ईस एजेन्सी की प्रमुख है , नकुल उससे मिलके खुद को शूट करने की इच्छा जताता है। एजेंट मारिया गोम्स उसे आश्वासन देती है कि उसकी मृत्यु निश्चित है क्योंकि उसने यह काम उपाध्याय (हिबा शाह) को सौंपा है | उपाध्याय एक निर्दयी हत्यारा है जो अपने काम के लिए बहुत प्रतिबद्ध है। वह एक ब्लेड से अपनी बाहों पर निशान बनाकर अपने पीड़ितों की हत्या की गिनती बनाए रखती है। अपने ही खून कि सुपारी देने के पश्चात में नकुल को एक पब्लिशिंग हाउस से उसके लिखे गये किताब में रुचि व्यक्त करने का फोन आता है | जैसे लगने लगता है नकुल के पक्ष में किस्मत पलटने लगी है। और कहानी आगे बढने लगती है | यह कहानी उत्तराखंड के हरसिल शहर में हुई ११ साधुओ कि हत्त्या और नकुल के बीच के संबध को बताने कि कोशिश करती नझर आती है|
गुलशन देवैया अपने किरदार को बखूबी नीभाते नझर आते है हालांकी सभी का अभिनय सहज है लेकीन आपका विशेष ध्यान मुख्य किरदार नकुल पर बनाये रखने में गुलशन देवैया काफी हद्द तक सफल होते दिखाई देते है| हिबा शाह जो के उपाध्याय के पात्र को साकार कर रही है उन्न्होने भी अपने किरदार को अपने अभिनय से चार चंद लागा दिए… और रोबिन दास जो के फोकाटीया बाबा का किरदार निभा रहे है वह भी अपने किरदार को सहजता से निभाते दिखाई देते नझर आ रहे है|
आपको इस सीरीज के संबंध मे कूछ और याद रहे ना रहे यह तीन किरदार आपको जरूर याद रहेंगे… कूछ कुछ जगहो पर इत्तेफ़ाक़ थोडेसे अधिक मात्रा मे लगने लगते है| जैसे एक ही वक़्त पर फोकाटीया बाबा और जीम का मिलना ठीक उसी वक्त नकुल और श्लोका का वाह होना और जीम और फोकाटीया बाबा द्वारा उन्हे बचाना और कूच ऐसेही प्रसंग है जीनका कही कोई संबंध जुडते नही दिखता फिर भी यह वेब सेरीएस आपको मनोरंजन करेने मे पुरी तरह से समर्थ है | आप इसे अगर ब्लैक कॉमेडी कि तरह देखेंगे तो आपको को भी इन संबधो के बारे मे सोचने की विशेष उस्तुकता नही होगी… कुल मिलाकर लेखक दिब्या चटर्जी, अनिर्बान दासगुप्ता, सौरव घोष और निर्देशक अनुभूति कश्यप आपका मनोरंजन करने मे सफल होते दिखाई देते है |

