Chintu Ka Birthday | Movie Review


Chintu Ka Birthday | चिंटू का बर्थडे | Movie Review

Chintu Ka Birthday | Movie Review

फिल्म “चिंटू का बर्थडे” एक भारतीय हिंदी भाषिक, ड्रामा फिल्म है, जो देवांशु कुमार और सत्यंशु सिंह द्वारा लिखित और निर्देशित है। यह कॉमेडियन तन्मय भट, रोहन जोशी, आशीष शाक्य और गुरसिमरन खम्बा ने अपने बैनर फर्स्ट ड्राफ्ट के तहत निर्मीत किया है। विनय पाठक, तिलोत्तमा शोम, सीमा पाहवा, वेदांत चिब्बर  और बिशा चतुर्वेदी द्वारा अभिनीत, यह फिल्म अप्रैल २००३ में सद्दाम के पतन के दौरान अपने परिवार के साथ इराक में फंसे चिंटू नामक एक 6 वर्षीय लड़के के बर्थडे की कहानी बताती है।

“चिंटू का बर्थडे” फिल्म को 2019 जागरण फिल्म फेस्टिवल पर प्रदर्शित किया गया था| ईसी माह की पहले हफ्ते में याने 5 जून 2020 को ZEE5 वेब एप पर रिलीज़ किया गया।

आईए अब रुख करते है फिल्म की कहानी की तरफ…


टायटल : चिंटू का बर्थडे | Chintu Ka Birthday

निर्देशन : देवांशु कुमार, सत्यंशु सिंह

निर्मिता : तन्मय भट, रोहन जोशी, आशीष शाक्य, गुरसिमरन खंबा

कथा, पटकथा : देवांशु कुमार, सत्यंशु सिंह

जेनर (शैली) : ड्रामा



कलाकार : किरदार

विनय पाठक : मदन तिवारी

तिलोत्तमा शोम : सुधा तिवारी

सीमा पहवा : नानी

बिशा चतुर्वेदी : लक्ष्मी

वेदांत चिब्बर : चिंटू

खालिद मासौ : महदी

रेजिनाल्ड एल बार्न्स : लुई जैक्सन

डैरेन रीड : नाथन स्कोल्ज़

कहानी

“चिंटू का बर्थडे” यह फिल्म वर्ष २००३ में अमरिका और ईराक के बीच चल रही युद्ध्जनक परीस्थितीयो के बीच इराक में फसे एक भारतीय परिवार की है जो अपने महज ६ वर्ष के बेटे “चिंटू” कि ख़ुशी की खातिर उसका बर्थडे उसके हिसाब से मनाना चाहते है, चिंटू जो के पिछले वर्ष में भी अपना बर्थडे युद्ध्जनक परीस्थितीयो के कारण मना नही पाया था, और इसबार चिंटू का परिवार चिंटू को मायुस होता देखना नही चाहता, सारी प्रतिकूल परिस्थितीयो के बावजुद चिंटू का पिता और पुरा परिवार कैसे चिंटू का बर्थडे मानाने कि कोशिश करते है, यह फिल्म परिवार के ईसी संघर्ष की कहानी को दर्शाता है|

चिंटू के पिता याने मदन तिवारी (विनय पाठक) जो के बिहार में पले बढे और वही शादी कर एक वाटर फिल्टर कंपनी मी सेल्स मन कि नोकरी करते थे| इराक में पिणे के पाणी कि कमी को एक अवसर कि तरह देख कंपनी के मलिक गिरीश चाचा चिंटू के पिता को वाटर फिल्टर की मार्केटिंग और सेल्स के लिए इराक भेज देते है जहा वह इराक कि राजधानी बगदाद में रहते है| उस वक्त इराक के राष्ट्रपती सद्दाम हुसैन होते है| बगदाद में बढीया व्यापार जमाने पर कंपनी के मालिक खुश होकर मदन तिवारी याने चिंटू के पापा के कहने पर मदन तिवारी के दादी समेत पुरे परिवार को इराक भेज देते है सबकूछ बढीया चल रहा होता है पुरा परिवार हसी ख़ुशी जिंदगी गुजर बसर कर रहा होता होता है और एक दिन अचानक अमरिका इराक के तब के राष्ट्रपती सद्दाम हुसैन पर अल कायदा जो के एक आतंकी संगठन ही उससे रिश्ते बनाने के लिए आरोपो में घेर लेते है जिसके कारण दोनो देशो के बीच युद्धजन्य परिस्थिती पैदा हो जाती है, जिस कारण चिंटू का परिवार इराक भारतीय दूतावास के सुचानावो तहत वहा से निकलने कि कोशिश करते है पर निकल नाही पाते क्युंकी उनके पासपोर्ट नेपाल के होते है इसका मतलब यह है के मदन तिवारी यानी चिंटू के पापा के मलिक उन्हे जाली पासपोर्ट बनाकर अवैध तरीकेसे इराक पहुचाते है यह बात जब परिवार मी पता चलती है तब सब मायुस हो जाते है और चिंटू के पापा की मा याने चिंटू की दादी उसके बाद से चिंटू के पापा को कोसणे का एक मौका नाही छोडती है| चिंटू के पापा को घर के अंदर और घर के बाहर की परीस्थितीयो से चार हात कर चिंटू का बर्थडे मनांना होता है| यह कहानी उसी संघर्ष की है|

फिल्म की कहानी चिंटू के बर्थडे के दिन की है और सारे सीन सिर्फ कहानी के लीहाज से एक घर में ही फिल्माए गए है| फिल्म के अतिरिक्त के दृश्य कहानी में 2D एनिमेशन कार्टून्स के स्वरूप में दर्शाये गए है| चिंटू के बर्थडे के दिन घर बर्थडे कि तैय्यारीया चल रही होती है सभी चिंटू को बधाई देते है और उसकी बडी बहन लक्ष्मि जो की स्कूल गई है वह स्कूल से आते वक्त चिंटू के लिए केक लेकर आने वाली होती है, लेकीन बगदाद मी फिरसे हालात गंभीर हो जाते है जिसके चलते स्कुलो को जल्दी छोडा जाता है सारे दुकान गालीयारे सील हो जाते है| जिसके बाद चिंटू के पिता को अपनी बडी बेटी लक्ष्मि जो की स्कूल जा चुकी है उसकी चिंता होने लगती है, उसी बीच महदी भाई जो की एक इराकी है और तिवारी परिवार के हमदर्द भी जीन्होन अपना खुदका घर तिवारी परिवार को रहने के लीए दे रखा ही वह लक्ष्मि को स्कूल से मह्फुज घर ले आते है| दुकाने बंद होने कि वजह से केक नही मिल पाता ही और लक्ष्मि वह घरं में ही केक बनाने मी लाग जाती है सभी तैय्यारीया में लगे होते ही और फिर एक बडा धमाका होता है, जिसके बाद घर में छान बिन करने के लिए अमरीकी लष्कर के दो जवान घर में घूस जाते है, इसी बीच महदी जो ईराकी कि है डर के मारे एक कमरे मी छिप जाता है और यहा कहानी नया मोड लेती है| इन सभी संघर्षो के बीच चिंटू के पिता आखिरकार परेशान होकर अमरीकी सैन्य अधिकारी से अपने गिरफ्तारी के ऐवज में चिंटू का बर्थडे मनाने की इजाजत लेकर सौदा कर लेते है|

विश्लेषण

यह पूरी फिल्म को एक कमरे के अंदर फिल्माए जाने के बावजुद आपको यह फिल्म ंभां जाएगी| फिल्म के दृश्य आपको मंत्र मुग्ध और भाऊक करने में काफी हद तक सफल होते दिखाई देते है| अगर निर्देशन कि बात करे तो कहानी के हिसाब से लोकेशन और सेट में मर्यादा होने के बावजुद फिल्म आपको बांधे रखने में सक्षम है ईसी से निर्देशक देवांशु कुमार और सत्यंशु सिंह की फिल्म के प्रती निष्ठा का परिचय हो जाता है| पटकथा में भी किसी भी प्रकार कि लापरवाही या कहे ढिलाई नही बरती गई है| फिल्म के संवाद जैसे विनय पाठक को नझर रख लिखे गए हो ऐसा प्रतीत होता है| बढीया संवाद और सभी कलाकारो द्वारा किया गया उमदा अभिनय फिल्म को बेहतरीन बनाता है| विनय पाठक अपने अभिनय से दर्शको को खासा प्रभावित करते नझर आ रहे है| कुल मिलाकर कहे तो यह एक बढीया फिल्म है| आप अगर कहानी के तर्ज पर फिल्म देखने वाले दर्शक है तो आप इसे जरूर देखना पसंद करेंगे|

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Chintu Ka Birthday | Official Trailer | A ZEE5 Original Film | Streaming Now on ZEE5

Ratings : 8.5/10

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